जरुरत हो तुम۔۔।

कुछ वक़्त की तरह हो तुम कभी मेरे लिए अच्छी कभी बुरी हो तुम उस गरजते मेघ की तरह हो तुम पानी को तरस रहे उस पौधे के लिए पानी की बूंद हो तुम। उस मरूस्थल के मिराज सी हो तुम पास मेरे फिर भी दूर हो तुम। सवाल अब भी ये रहा तुझसे आखिर कौन हो तुम? सौरमंडल के उस सूर्य सा प्रकाश हो तुम चांद भी जिसे देखकर शर्मा जाए वो हुस्न-ए-मल्लिका हो तुम जवाब अब भी ना मिला हमें तुम्हारा पर जानता हूं आज भी मैं जो भी हो, जैसी भी हो कुछ उस वक़्त की तरह खास हो मूल्यवान हो जरुरत हो तुम।।। 🖊️ अभिजीत मिश्रा।।